अखियां है प्यासी प्यासी मनवा में पूर्णमासी लिरिक्स (सावन मल्हार)

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अरि बहना अखियां हैं प्यासी प्यासी मनवा में पूरनमासी सावन मल्हार के पूरे बोल (Lyrics) और विस्तृत भावार्थ हिंदी में पढ़ें। सावन के इस प्रसिद्ध लोकगीत का आनंद लें!
अखियां है प्यासी प्यासी मनवा में पूर्णमासी लिरिक्स (सावन मल्हार)
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जय सावन! रिमझिम फुहारें, चारों ओर लहराती हरियाली और बादलों की सुहानी गर्जना के साथ सावन का पावन महीना भारतीय जनमानस में असीम भक्ति, सौंदर्य और प्रेम की भावना का संचार करता है। सावन का महीना केवल मौसम का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह लोक संस्कृति, गीतों और त्योहारों का ऐसा संगम है जहाँ प्रकृति स्वयं झूम उठती है।

सावन और भदौ की ऋतु में जब महिलाएं बगीचों में झूला डालती हैं और तीज का उत्सव मनाती हैं, तब आकाश में उमड़ती काली घटाओं के बीच लोकगीतों की गूंज हर हृदय को प्रफुल्लित कर देती है। इन्हीं लोकगीतों में सबसे भावुक, सुरीला और लोकप्रिय सावन मल्हार है— “अरि बहना अखियां हैं प्यासी प्यासी, मनवा में पूरनमासी, अब तक न आयो मेरो साजना”

यदि आप भी इस प्रसिद्ध पारंपरिक सावन गीत / कजरी (Sawan Malhar Lyrics) के सटीक बोल खोज रहे हैं, तो इस लेख में आपको इस संपूर्ण गीत के प्रामाणिक बोल और इसका सुंदर काव्य भावार्थ (Meaning) पढ़ने को मिलेगा।

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‘अखियां है प्यासी प्यासी मनवा में पूर्णमासी’ - सावन मल्हार परिचय

उत्तर भारत के ब्रज, अवध और बुंदेलखंड अंचल में सावन के आगमन के साथ ही मल्हार तथा कजरी गाने की सदियों पुरानी परंपरा रही है। ‘अखियां है प्यासी प्यासी’ केवल एक साधारण गीत नहीं है, बल्कि यह विरह रस (Pangs of Separation) का एक अद्भुत उदाहरण है।

इस गीत में नायिका अपनी अंतरंग सखी (बहना) से अपने मन की व्याकुलता व्यक्त कर रही है। बाहर घटाएं घिर आई हैं, बूंदें बरस रही हैं और मन में पूरनमासी का उजाला होने की लालसा है, लेकिन साजना के न आने से नैन प्यासे के प्यासे ही रह गए हैं।

विवरण कारकविवरण जानकारी
गीत का नाम (Song Title)अरि बहना अखियां हैं प्यासी प्यासी (Ari Bahna Akhiyan Hain Pyasi Pyasi)
गीत की विधा (Genre)सावन मल्हार / पारंपरिक लोकगीत (Sawan Malhar / Kajri Lokgeet)
मुख्य विषय (Theme)सावन में विरह वेदना, प्रियतम का इंतजार, मानसून प्राकृतिक सौंदर्य
प्रसिद्ध गायक (Popular Artists)अंजलि जैन, ममता शास्त्री, संजो बघेल एवं लोक कलाकार
संबद्ध त्योहार (Associated Festivals)हरियाली तीज, कजरी तीज, नागपंचमी एवं सावन सोमवार
भाषा/बोली (Language/Dialect)सुगम ब्रज-अवधी मिश्रित लोक भाषा (Hindi Folk Dialect)
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🎵 ‘अरि बहना अखियां हैं प्यासी प्यासी’ - संपूर्ण गीत के बोल (Full Lyrics in Hindi) 🎵

नीचे इस कालजयी सावन लोकगीत के मुखड़े और चारों अंतरों के प्रामाणिक एवं शुद्ध बोल दिए गए हैं:

॥ मुखड़ा ॥
अरि बहना अँखियाँ हैं प्यासी-प्यासी,
मनवा में पूरनमासी,
अब तक न आयो मेरो साजना।
हो... अरि बहना अँखियाँ हैं प्यासी-प्यासी,
मनवा में पूरनमासी,
अब तक न आयो मेरो साजना॥

॥ पहला अंतरा ॥
ओ देखो श्याम घटा घिर आई,
बिजली ये मोपे काहे गिराई।
हिचकी रह-रह के आई,
अब तक ना आयो मेरो साजना।
अरि बहना अँखियाँ हैं प्यासी-प्यासी,
मनवा में पूरनमासी,
अब तक न आयो मेरो साजना॥

॥ दूसरा अंतरा ॥
सावन की रूत में बिछड़ो सांवरिया,
दे गयो ऐसो मेहा।
बूंदन की धुन गाये रहो मल्हार,
हमार नैहा।
अरि बहना अँखियाँ हैं प्यासी-प्यासी,
मनवा में पूरनमासी,
अब तक न आयो मेरो साजना॥

॥ तीसरा अंतरा ॥
कुहू-कुहू मत बोले कोयलिया,
सुन-सुन झुलसे देहा।
बहना नीचे सिगराो घर-आँगन,
भीजे मन का वृन्दावन।
अब तक न आयो मेरो साजना।
अरि बहना अँखियाँ हैं प्यासी-प्यासी,
मनवा में पूरनमासी,
अब तक न आयो मेरो साजना॥

॥ चौथा अंतरा ॥
नैनों में छाई है विरह की बदरिया,
तरसे रे मोरी पपिहा सी नजरिया।
कसम दुहाई तोहे ओ री सहेलिया,
कब आएंगे मोरे सांवरिया।
अरि बहना अँखियाँ हैं प्यासी-प्यासी,
मनवा में पूरनमासी,
अब तक न आयो मेरो साजना॥

📖 गीत का संपूर्ण भावार्थ एवं काव्य सौंदर्य (Line-by-Line Meaning)

इस सुंदर सावन मल्हार की एक-एक पंक्ति में विरह, तड़प और प्राकृतिक सौंदर्य का सजीव चित्रण छिपा हुआ है। आइए इसके पदों के अर्थ को गहराई से समझें:

1. मुखड़े का भावार्थ:

“अरि बहना अँखियाँ हैं प्यासी-प्यासी, मनवा में पूरनमासी, अब तक न आयो मेरो साजना…”

अर्थ: विरहिणी स्त्री अपनी सखी से कहती है— हे बहना! सावन के इस सुहावने मौसम में मेरी आंखें अपने प्रियतम का दीदार करने के लिए प्यासी हैं। मेरे मन में तो पूर्णिमा की भांति मिलन की अभिलाषा और उजाला है, परंतु दुख की बात यह है कि सावन आ गया फिर भी मेरे साजना (पति) घर वापस नहीं आए हैं।

2. प्रथम अंतरे का भावार्थ:

“ओ देखो श्याम घटा घिर आई, बिजली ये मोपे काहे गिराई…”

अर्थ: आसमान में काले-काले (श्याम) बादल घिर आए हैं। ऐसे में जब आकाशीय बिजली चमकती है, तो वह विरहिणी के हृदय में तड़प पैदा करती है। उसे हिचकियां आ रही हैं (जो प्रियतम की याद का प्रतीक हैं), परंतु प्रियतम की राह तकते-तकते शाम ढल रही है और वे अभी तक नहीं पहुंचे।

3. द्वितीय अंतरे का भावार्थ:

“सावन की रूत में बिछड़ो सांवरिया, दे गयो ऐसो मेहा…”

अर्थ: सावन की इस वर्षा ऋतु में मेरे सांवरिया (प्रियतम) मुझसे दूर चले गए हैं और ऐसा वर्षा काल छोड़ गए हैं जहाँ वर्षा की बूंदों की सरसराहट मल्हार राग गाती हुई प्रतीत होती है। हमारा प्रेम (नैहा) इस वर्षा की धुन में तड़प रहा है।

4. तृतीय अंतरे का भावार्थ:

“कुहू-कुहू मत बोले कोयलिया, सुन-सुन झुलसे देहा…”

अर्थ: आम के पेड़ों पर बैठकर जब कोयल कुहू-कुहू की मीठी तान छेड़ती है, तो विरह की अग्नि में जल रही नायिका को वह तान शीतल लगने के बजाय देह को झुलसाने वाली लगती है। बाहर सारा घर-आंगन बारिश के पानी से भीग रहा है और मन का वृन्दावन (हृदय का अनुराग) विरह के अश्रुओं से भीग रहा है।


🌺 सावन और हरियाली तीज उत्सव में मल्हार का सांस्कृतिक महत्त्व

भारतीय लोक संस्कृति में सावन का महीना केवल मौसमी परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह रिश्तों को सुदृढ़ करने और प्रकृति के साथ एकाकार होने का समय है:

  1. झूला उत्सव और सखियों का मिलन: सावन के महीने में गांवों और शहरों में नीम व बरगद के पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं। महिलाएं और बालिकाएं एक साथ मिलकर झूला झूलते हुए मल्हार और कजरी गाती हैं।
  2. हरियाली तीज एवं कजरी तीज: तीज के त्यौहार पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं और मायके आकर अपनी सहेलियों के साथ इस पारंपरिक लोकगीत का गायन करती हैं।
  3. प्रकृति और मानव संवेदना का जुड़ाव: इस गीत में काली घटाओं, वर्षा की बूंदों, कोयल की कूक और पपीहे की टेर को मानव मन की विरह वेदना से जोड़ा गया है, जो भारतीय साहित्य की अनुपम विशेषता है।

🎙️ प्रमुख लोक कलाकार एवं लोकप्रिय संस्करण (Famous Singers)

यद्यपि ‘अखियां है प्यासी प्यासी’ एक पारंपरिक लोक रचना है, जिसे पीढ़ियों से मौखिक रूप से गाया जाता रहा है, परंतु आधुनिक समय में कई प्रमुख लोक गायकों ने इसे अपनी मधुर आवाज देकर अमर बना दिया है:

  • अंजलि जैन (Anjali Jain): अंजलि जैन द्वारा गाए गए सावन मल्हार और देहाती लोकगीत यूट्यूब पर बेहद लोकप्रिय हैं। उनके द्वारा गाए गए इस गीत के संस्करण को लाखों श्रोताओं ने सराहा है।
  • ममता शास्त्री (Mamta Shastri): ब्रज और बुंदेलखंडी शैली में ममता शास्त्री की प्रस्तुति में लोक जीवन का ठेठ ग्रामीण स्पर्श देखने को मिलता है।
  • संजो बघेल (Sanjo Baghel): आला और लोकगीतों की महारानी संजो बघेल ने भी सावन के कई मल्हारों में इस भाव को बहुत ही सुरीले अंदाज में प्रस्तुत किया है।

💡 सावन में इस लोकगीत को गाने और सुनने का सही अवसर

  • शाम के समय झूला झूलते हुए: जब हल्की बारिश हो रही हो और ठंडी हवा चल रही हो, तब सखियों के साथ मिलकर इस गीत को गाने से मन को असीम आनंद प्राप्त होता है।
  • सावन सोमवार एवं शिव पूजा के दौरान: सावन में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के उपरांत रात्रि जागरण या भजन संध्या में लोक-भक्ति गीतों के रूप में इसका गायन किया जाता है।
  • तीज महोत्सव सांस्कृतिक कार्यक्रम: हरियाली तीज पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक मंचों पर यह गीत सावन नृत्य और मल्हार गायन के लिए पहली पसंद बनता है।

📌 निष्कर्ष (Conclusion)

“अरि बहना अखियां हैं प्यासी प्यासी, मनवा में पूरनमासी” सावन का एक ऐसा अमूल्य लोकगीत है जो भारतीय संस्कृति, वर्षा ऋतु के सौंदर्य और विरह रस की पराकाष्ठा को सुंदरता से समेटे हुए है। यह गीत हमें हमारी लोक जड़ों से जोड़ता है और सावन के महीने को संगीतमय बनाता है।

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जय भोलेनाथ! सावन की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं! 🌧️🍃

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Sandhata
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Editor-in-Chief

Poetry curator and Editor-in-Chief, selecting and crafting heart-touching Hindi Shayari, Gazals, Love Quotes, and Status collections.

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