मंगला गौरी व्रत 2026: पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा व नियम

8 min read
Add as a preferred source
सावन के पहले मंगला गौरी व्रत (4 अगस्त 2026) की सही शास्त्रोक्त पूजा विधि, 16 श्रृंगार नियम, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और उद्यापन विधि जानें।
मंगला गौरी व्रत 2026: पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा व नियम
ADVERTISEMENT
Listen to article
8 minutes

🌺 मंगला गौरी व्रत 2026: सावन मंगलवार का धार्मिक महत्व व परिचय

सनातन धर्म में श्रावण (सावन) का पूरा महीना भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। जिस प्रकार सावन का प्रत्येक सोमवार भगवान भोलेनाथ को समर्पित है, उसी प्रकार सावन का प्रत्येक मंगलवार माता मंगला गौरी (देवी पार्वती का मंगलकारी स्वरूप) की साधना और पूजा के लिए अत्यंत पावन माना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, सावन मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत सुहागिन महिलाओं के जीवन में अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु, दांपत्य जीवन में प्रेम तथा संतान प्राप्ति के लिए अचूक माना गया है। साथ ही, जिन कुंवारी कन्याओं के विवाह में बाधाएं आ रही हों या जिनकी कुंडली में मंगल दोष (Mangal Dosha) हो, उनके लिए यह व्रत शीघ्र विवाह का योग बनाता है।

ADVERTISEMENT

Also read: Top 5 Viral Mahadev AI Photo Editing Prompts for Boys

सावन मंगला गौरी व्रत 2026 की तिथियां एवं शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में उत्तर भारत पंचांग (पूर्णिमांत कैलेंडर) के अनुसार सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026 (मंगलवार) को पड़ रहा है। सावन के महीने में कुल 4 मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे।

सावन मंगला गौरी व्रत 2026 की संपूर्ण तिथि सूची:

  • प्रथम मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त 2026 (मंगलवार)
  • द्वितीय मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त 2026 (मंगलवार)
  • तृतीय मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त 2026 (मंगलवार)
  • चतुर्थ मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त 2026 (मंगलवार)
ADVERTISEMENT

4 अगस्त 2026 (प्रथम मंगला गौरी व्रत) के शुभ मुहूर्त:

शुभ मुहूर्त का नामसमय अवधि (4 अगस्त 2026)धार्मिक महत्व व प्रयोग
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 04:20 बजे से 05:02 बजे तकप्रातः स्नान, ध्यान व मंगला गौरी व्रत संकल्प हेतु।
प्रातःकाल पूजा मुहूर्तसुबह 05:44 बजे से 08:26 बजे तकमाता पार्वती व गणेश जी के पूजन का उत्तम समय।
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तकविशेष मनोकामना पूर्ति एवं कथा पाठ का समय।
संध्या आरती मुहूर्तशाम 06:51 बजे से रात 08:15 बजे तक16 आटे के दीपकों से मंगला गौरी आरती करने हेतु।

🕉️ मंगला गौरी व्रत में ‘16’ की संख्या का विशेष महत्व (Importance of Number 16)

मंगला गौरी पूजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रस्तुत की जाने वाली अधिकांश सामग्रियां 16 की संख्या में चढ़ाई जाती हैं। 16 अंक षोडश कलाओं, षोडश मातृकाओं और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।

पूजा में प्रयुक्त 16 सामग्रियां:

  1. 16 सुहाग सामग्री: सिंदूर, कुमकुम, बिंदी, काजल, मेहंदी, चूड़ियां, बिछिया, पायले, लाल चुनरी, कंघी, शीशा, अलता, इत्र, नथ, महावर और तेल।
  2. 16 फल एवं फलफूल: 16 प्रकार के मौसमी फल।
  3. 16 पुष्प व पत्तियां: 16 बेलपत्र, 16 शमी के पत्ते, 16 धतूरा या फूल।
  4. 16 दीपदान: शुद्ध आटे से बने 16 दीपक जिनमें चौमुखा दीया जलाया जाता है।
  5. 16 अनाज व मेवे: 16 दाने जीरा, 16 दाने धनिया, 16 दाने धान, 16 मेवे आदि।

🌸 मंगला गौरी व्रत की संपूर्ण शास्त्रोक्त पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

मंगला गौरी व्रत को शास्त्रानुसार संपन्न करने के लिए नीचे दी गई सरल एवं प्रामाणिक पूजा विधि का पालन करें:

  1. स्नान व संकल्प: मंगलवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल व अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें: “मम सुहाग अभिवृद्धये पुत्र पौत्रादि समृद्धये मंगलागौरी व्रतमहं करिष्ये।”
  2. चौकी स्थापना: पूजा स्थान पर एक लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल रंग का नया कपड़ा बिछाएं।
  3. प्रतिमा स्थापना: चौकी पर भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती (या मंगला गौरी की मूर्ति/चित्र) स्थापित करें। मिट्टी से बनी मंगला गौरी माता (काली मिट्टी व गेहूं के आटे से बनी प्रतिमा) की स्थापना भी उत्तम मानी जाती है।
  4. पंचामृत व जलाभिषेक: सर्व प्रथम भगवान गणेश का पूजन करें। तत्पश्चात माता मंगला गौरी को जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से स्नान कराएं।
  5. 16 श्रृंगार अर्पण: माता गौरी को रोली, चंदन, कुमकुम और 16 प्रकार की सुहाग सामग्रियां (सिंदूर, चूड़ी, चुनरी आदि) अर्पित करें।
  6. 16 भोग अर्पण: माता को 16 फल, 16 लड्डू, 16 मखाने, 16 जीरा-धनिया दाने तथा आटे का भोग लगाएं।
  7. 16 दीपकों से आरती: शुद्ध आटे से बने 16 चौमुखा दीपकों में रुई की बत्ती रखकर देसी घी से जलाएं और माता मंगला गौरी की भावपूर्ण आरती करें।
  8. कथा श्रवण: आरती के पश्चात हाथ में 16 गेहूं या चावल के दाने लेकर मंगला गौरी व्रत कथा सुनें।

Also read: 50+ Best Bhakti Shayari in Hindi (2026) | भगवान की पावन शायरी


🚩 मंगला गौरी व्रत की पौराणिक कथा (Mangla Gauri Vrat Katha)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में ‘कुरु देश’ में धर्मपाल नाम का एक अत्यंत समृद्ध और धर्मनिष्ठ सेठ रहता था। उसके पास अपार धन-दौलत और सम्मान था, परंतु उसकी कोई संतान नहीं थी। अत्यधिक पूजा-पाठ और तपस्या के बाद उसे एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम धर्मदास रखा गया।

परंतु विद्वान ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि धर्मदास की आयु अल्प है और 16वें वर्ष में सर्पदंश से उसकी मृत्यु निश्चित है। सेठ धर्मपाल ने अपने पुत्र का विवाह एक ऐसी संस्कारी कन्या से कराया जिसकी माता सदैव सावन के मंगलवार को भक्तिभाव से मंगला गौरी का व्रत रखती थीं।

माता मंगला गौरी के व्रत और सुहाग आशीर्वाद के प्रभाव से उस कन्या को कभी न खत्म होने वाले अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त था। विवाह के पश्चात जब काल (सर्प) धर्मदास को डसने आया, तो देवी मंगला गौरी के प्रभाव से वह विषहीन होकर लौट गया। इस प्रकार मंगला गौरी व्रत के प्रताप से धर्मदास को दीर्घायु प्राप्त हुई और उसके घर में सुख-समृद्धि का वास हुआ।

🌺 मंगला गौरी व्रत के नियम, आहार व उद्यापन विधि (Rules, Diet and Udyapan)

व्रत के मुख्य नियम (Vrat Rules)

  • एकभुक्त फलाहार: मंगला गौरी व्रत में केवल एक समय (शाम की आरती के पश्चात) सात्विक अलोना (बिना नमक का भोजन या केवल सेंधा नमक) या फलाहार ग्रहण किया जाता है।
  • सुहाग सामग्री दान: पूजा के पश्चात 16 सुहाग सामग्रियां किसी सुहागिन महिला या ब्राह्मणी को आदरपूर्वक दान करनी चाहिए।
  • क्रोध व कलह त्याग: व्रत के दिन परिवार में शांति बनाए रखें और मन में ओम नमः शिवाय तथा माता पार्वती के मंत्रों का ध्यान करें।

मंगला गौरी व्रत उद्यापन विधि (Udyapan Vidhi)

मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत लगातार 5 वर्षों तक सावन के प्रत्येक मंगलवार को रखा जाता है। 5वें वर्ष के सावन के अंतिम मंगलवार को इस व्रत का उद्यापन किया जाता है। उद्यापन के दिन हवन, 16 सुहागिन महिलाओं को भोजन तथा 16 सुहाग पिटारी (श्रृंगार सामग्री) का दान करके आशीर्वाद लिया जाता है।


❓Important FAQs - Mangla Gauri Vrat

Q1. 2026 में पहला मंगला गौरी व्रत कब है?

Ans: 2026 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026 (मंगलवार) को रखा जाएगा।

Q2. क्या कुंवारी लड़कियां मंगला गौरी व्रत रख सकती हैं?

Ans: हां। कुंवारी कन्याएं मनचाहा व योग्य जीवनसाथी पाने तथा अपनी कुंडली से मंगल दोष दूर करने के लिए मंगला गौरी का व्रत रख सकती हैं।

Q3. मंगला गौरी व्रत में नमक खा सकते हैं या नहीं?

Ans: पारंपरिक रूप से मंगला गौरी व्रत बिना नमक का (अलोना) रखा जाता है। परंतु यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या हो, तो शाम को एक समय सेंधा नमक का सात्विक फलाहार लिया जा सकता है।

Q4. मंगला गौरी व्रत कितने वर्षों तक रखना चाहिए?

Ans: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगला गौरी व्रत लगातार 5 वर्षों तक सावन के सभी मंगलावारों को रखा जाता है और 5वें वर्ष में विधि-विधान से उद्यापन किया जाता है।

ADVERTISEMENT
Sandhata
Curated BySandhata
Editor-in-Chief

Poetry curator and Editor-in-Chief, selecting and crafting heart-touching Hindi Shayari, Gazals, Love Quotes, and Status collections.

View all Shayari by Sandhata

Related stories

Notification Status