नमस्ते सदा वत्सले: RSS की प्रार्थना का इतिहास, अर्थ और महत्व
नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे! यह केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लाखों स्वयंसेवकों के लिए एक दैनिक संकल्प और राष्ट्रभक्ति का मंत्र है। यहाँ इस प्रार्थना के इतिहास, अर्थ और महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है।
प्रार्थना का इतिहास: कब, किसने लिखी?
संघ की स्थापना के शुरुआती दिनों में कोई निश्चित प्रार्थना नहीं थी। वर्तमान प्रार्थना के निर्माण की प्रक्रिया 1939 में शुरू हुई थी।
रचना काल: इस प्रार्थना की रचना फरवरी 1939 में महाराष्ट्र के सिंदी में आयोजित एक बैठक के दौरान हुई थी।
रचयिता: इसके मुख्य रचयिता नरहरि नारायण भिड़े (भिड़े गुरुजी) थे। उन्होंने इसे संस्कृत में तैयार किया था। इस कार्य में उन्हें डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (श्री गुरुजी) का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कब अपनाई गई: इसे औपचारिक रूप से 1940 में नागपुर के संघ शिक्षा वर्ग में पहली बार सामूहिक रूप से गाया गया और तब से यह संघ की आधिकारिक प्रार्थना बन गई।
मूल प्रार्थना (संस्कृत)
नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे,
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे,
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ॥1॥
प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता,
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्।
त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयम्,
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये ॥2॥
अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं,
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्।
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं,
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत् ॥3॥
समुत्कर्षनिःश्रेयसस्यैकमुग्रं,
परं साधनं नाम वीरव्रतम्।
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा,
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रा निशम् ॥4॥
विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्,
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं,
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ॥5॥
॥ भारत माता की जय ॥
प्रार्थना का हिंदी अनुवाद
1. हे वत्सल मातृभूमि! मैं आपको सदा प्रणाम करता हूँ। हे हिंदू भूमि! आपके ही गोद में मेरा सुखपूर्वक पालन-पोषण हुआ है। हे महामंगलमयी पुण्यभूमि! आपके ही कार्यों के लिए मेरा यह शरीर अर्पण हो। आपको बारंबार नमस्कार है।
2. हे सर्वशक्तिमान ईश्वर! इस हिंदू राष्ट्र के घटकों के रूप में हम आपको सादर प्रणाम करते हैं। आपके ही कार्य के लिए हमने अपनी कमर कसी है, हमें इसे पूरा करने का आशीर्वाद दें।
3. हे ईश्वर! हमें ऐसी अजेय शक्ति दें जिसे पूरी दुनिया न जीत सके, और ऐसा उत्तम चरित्र दें जिसके सामने विश्व नतमस्तक हो। हमने स्वयं ही जिस कठिन मार्ग को चुना है, वह हमारे पुरुषार्थ से सुगम हो जाए।
4. लौकिक उन्नति और आध्यात्मिक मोक्ष का एकमात्र साधन वीरव्रत हमारे भीतर बना रहे। हमारे हृदयों में अपने ध्येय के प्रति अटूट निष्ठा और तीव्र लगन दिन-रात जागृत रहे।
5. हमारी यह संगठित कार्यशक्ति विजयी हो और अपने धर्म की रक्षा करते हुए इस राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने में पूरी तरह समर्थ हो। हे ईश्वर! आपकी कृपा से यह सिद्ध हो।
English Translation
1. O affectionate Motherland, I salute You forever. O Hindu Land, I have been happily brought up by You. O Most Auspicious Holy Land, may this body of mine be offered for Your sake. I bow to You again and again.
2. O almighty God, we, the integral parts of this Hindu Nation, salute You with respect. We have girded up our loins for Your cause; give us Your holy blessings for its fulfillment.
3. O Lord, grant us such invincible strength that no power in the world can defeat it, and such noble character that the whole world bows to it. May the path we have chosen be made easy by our own efforts.
4. May the supreme means of achieving both worldly prosperity and spiritual bliss, which is the Vow of Heroism, shine within us. May an undying devotion to our goal remain constantly awake in our hearts.
5. May our organized power of action be victorious, and by protecting our Dharma, may it be fully capable of leading this nation to the pinnacle of glory. May this be accomplished by Your blessings.
Conclusion
आरएसएस की यह प्रार्थना व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र प्रथम की भावना सिखाती है। इसमें मातृभूमि को सर्वोच्च मानकर उसकी सेवा का संकल्प लिया गया है। यह प्रार्थना उन करोड़ों स्वयंसेवकों के भावों का प्रतिनिधित्व करती है जो भारत को पुनः परम वैभव पर देखना चाहते हैं।