वो आदमी भी यहाँ हम ने बद-चलन देखा - पढिये गोपालदास नीरज की लाजवाब कविता

बदन पे जिस के शराफ़त का पैरहन देखा, वो आदमी भी यहाँ हम ने बद-चलन देखा। पढिये गोपालदास नीरज की लाजवाब कविता
MR. SANDHATA

वो आदमी भी यहाँ हम ने बद-चलन देखा

गोपालदास नीरज की कविता - वो आदमी भी यहाँ हम ने बद-चलन देखा

 बदन पे जिस के शराफ़त का पैरहन देखा,
वो आदमी भी यहाँ हम ने बद-चलन देखा।
ख़रीदने को जिसे कम थी दौलत-ए-दुनिया,
किसी कबीर की मुट्ठी में वो रतन देखा।।

मुझे मिला है वहाँ अपना ही बदन ज़ख़्मी,
कहीं जो तीर से घायल कोई हिरन देखा।
बड़ा न छोटा कोई फ़र्क़ बस नज़र का है,
सभी पे चलते समय एक सा कफ़न देखा।।

ज़बाँ है और बयाँ और उस का मतलब और,
अजीब आज की दुनिया का व्याकरन देखा।
लुटेरे डाकू भी अपने पे नाज़ करने लगे,
उन्होंने आज जो संतों का आचरन देखा।।

जो सादगी है कुहन में हमारे ऐ 'नीरज',
किसी पे और भी क्या ऐसा बाँकपन देखा।।

लेखक: गोपालदास नीरज

Rate your experience

WE VALUE YOUR REVIEWS. PLEASE WRITE A REVIEW ON THE PLAY STORE!