Best Sad Shayari in Hindi (2026) | Heart Touching and Emotional Lines

Looking for the best Sad Shayari in Hindi? Explore our latest collection of heart-touching and emotional sad shayari and life teaching lines.

LATEST SAD SHAYARI IN HINDI

जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जब हम खुद को बेहद अकेला महसूस करते हैं और अपने दर्द को बयां करने के लिए सही शब्दों की तलाश करते हैं। Sad Shayari (सैड शायरी) वही जरिया है जो टूटे हुए दिल के जज्बातों को जुबां देती है। चाहे प्यार में मिला धोखा हो, अधूरी मोहब्बत हो, या फिर जिंदगी की उलझनें, शायरी के माध्यम से हम अपने अंदर छिपे तूफान को शांत कर सकते हैं।

Sad shayari in hindi 2026

इस पोस्ट में हमने आपके लिए Best Sad Shayari in Hindi, Heart Touching Broken Heart Quotes और Emotional Status का एक बेहतरीन संग्रह तैयार किया है। यहाँ आपको हर वो अहसास मिलेगा जो आपके दिल के करीब है। इन दर्द भरी शायरियों (Dard Bhari Shayari) को आप अपने WhatsApp, Facebook, Twitter या Instagram पर शेयर करके अपने दिल का हाल बयां कर सकते हैं।

ताल्लुक .. की कीमत चुकाता रहता हूं।
मैं उसके झूठ पर भी मुस्कुराता रहता हूं।।
मगर गरीब की बातों को कौन सुनता है।
मैं बादशाह था सबको बताता रहता हूं।।

Sad shayari in hindi 2026

वक्त की रेत हाथों से कुछ यूं फिसल गई।
जब तक समझ पाते, जिंदगी निकल गई।।

Sad shayari in hindi 2026

मलाल हमको है कि हम मना नहीं पाए।
मलाल उसको भी होगा कि मान जाना था।।

Sad shayari in hindi 2026

मतलब की दुनिया है फरेब का जमाना है।
दिलों में नफ़रत है और मुंह पर याराना है।।

Sad shayari in hindi 2026

बस इस सबक से तुझपे तो बहुत भरोसा था।
गिले अगर ना भी हों तो हैरानियां तो होंगी ना।।

तीर हल्का है अपना मुकद्दर की हवा से।
फेंकता कहीं और हूं, गिरता कहीं और है।।

Sad shayari in hindi 2026

ठहराव था ही नहीं, रूकती थी निकल लेती थी।
मैं कपड़े बदलते सोचता वो मर्द बदल लेती थी।।

पंख परिंदों के ही अच्छे लगते हैं,
इंसान के लगते ही बर्बादी शुरू हो जाती है।

Sad shayari in hindi 2026

उठाकर देखी मैंने आज यादों की पुरानी किताब,
पिछले साल इन्हीं दिनों की बात ही कुछ और थी।

Sad shayari in hindi 2026

घड़ी से लाख महंगा तो घड़ी का वक्त होता है।
जो इसकी कद्र करता है उसी का वक्त होता है।।
उदासी लुफ्त लेने को चली आती है महलों से।
हमारी झोपड़ी में जब भी खुशी का वक्त होता है।।
सितम यह है कि हम जैसे गरीबों की कलाई में।
घड़ी होती किसी की है किसी का वक्त होता है।।

पतझड़ में आज़मा लेना हमको ऐ साहिबा !
अभी तो सावन है हर पत्ता हरा ही नजर आएगा।।

धरा पे चंदा की चांदनी गगन पे तारा नहीं मिलेगा।
कद्र ग़र कुदरत की ना हुई तो ये नजारा ना मिलेगा।।

फ़िर से नया शख़्स मुझे समझने आया है,
मैं सोच रहा हूं उसे अपने पुराने किस्से सुना दूं।

दुनिया किरदार से नहीं हालात से इज्ज़त देती है,
फ़कीर बादशाह बने तो रिश्तेदार निकल आते हैं।

तुमने जो रचाई है अपने हाथों पर मेहंदी।
वह मेंहदी नहीं हमारे दिल का खून है।।

इस भरी गर्मी में कुछ तो सुकून आ जाए। ❣️
या तो आप आ जाइए या मानसून आ जाए।।

रोज़ सजते हैं जो कोठों पर हवस का दस्तर,
लोग अगर दरिंदे ना होते तो वो माएं होतीं !!

बेवफ़ाओं के किस्मत में प्यार नहीं होता,
उम्र बीत जाती है, महबूब बदलते बदलते।

मोहब्बत के भी कुछ अंदाज होते हैं।
और जागती आंखों में भी ख्वाब होते हैं।।
जरूरी नहीं कि गम में ही आंसू निकले।
मुस्कुराती आंखों में भी दर्द के सैलाब होते हैं।।

तेरी खता नहीं जो तूं गुस्से में आ गया।
पैसे का जोश था तेरे लहजे में आ गया।।
सिक्का उछाल करके तेरे पास क्या बचा।
देख तेरा गुरूर तो मेरे कांसे में आ गया।।

सिगरेट और गांजा तो बच्चे फूंकते हैं।
हमने तो अपना पूरा कैरियर ही फूंक रखा है।।

तुम आसान समझते हो उम्मीदों का टूट जाना।
हमसे पूछो सबकुछ पाकर कुछ ना पाना।।
मुस्कुराते हुए आंसू भी निकल आएंगे।
कभी वक्त के हाथों से तमाचा खाना।।

दुनियादारी में थोड़े कच्चे रह गए।
बस हमीं सभी के साथ अच्छे रह गए।।

करार दिल को सदा जिसके नाम से आया।
वह आया तो और किसी काम से से आया।।

जहां तक मुमकिन था कहानी सुनाई गयी।
जब गला भर आया तो फिर कलम उठाई गयी।।

एक हादसा कुछ यूं हुआ था एक बार, कि
उसके बाद जिंदगी कभी महसूस नहीं हुई..! ❤️‍🩹

तुम से बिछड़ के फिर कोई हसरत नहीं बची।
फिर तेरे जैसे शख्स़ से मिलना नहीं हुआ।। 🥀

उठोगे अगर तुम तो चल देंगे हम भी।
यह महफ़िल किसी की सगी तो नहीं है।।

सभी के जिस्म पर अच्छाई की मोहरें थी। 😊
❤️‍🩹 उस अंजुमन में अकेला खराब में ही था।

अदब की महफ़िलों में यूं हुआ सुखन घायल।
किसी का ज़ह्न था घायल कहीं कहन घायल।।
छुङा के हाथ गया है वो जब से महफ़िल से।
हुए हैं चहरे सभी ज़र्द अंजुमन घायल।।

बात दिन की नहीं अब रात से डर लगता है।
कच्चा मेरा मकान है बरसात से डर लगता है।।
प्यार को छोड़कर कोई और बात कर लो।
अब मुझे प्यार की हर बात से डर लगता है।।

कभी इस जुर्म पर सर काट दिए जाते थे।
अब तो इनाम दिया जाता है गद्दारी पर।।

तुमने कहा था हर शाम तेरा हाल पूछेंगे।
अब बदल गए हो या तुम्हारे शहर में शाम नहीं होती?

तकब्बुर नेकी को खा जाता है।
तुमने तो गुनाहों पर फक्र किया है।।
तकब्बुर = अहंकार, फक्र = घमंड।

यह खुली खुली सी ज़ुल्फ़ें इन्हें लाख तुम संवारो,
ये मेरे हाथ से संवरती तो कुछ और बात होती।
मुझे अपनी ज़िंदगी का कोई ग़म नहीं है लेकिन,
तेरे दर पे जाँ निकलती तो कुछ और बात होती!!

तुमने बस सुना है हम पर तो बीती है।
यह जो मोहब्बत है न सच में खून पीती है।।

तकाजा उम्र का ही समझो हम खतरे भांप लेते हैं।
और वो समझते हैं कि हमें परहेज है इश्क से।।

किसी धोखेबाज शख्स से इश्क़ का हो जाना।
समझो बद्दुआ लगी है किसी चाहने वाले की।।

बोतल पर बोतल पीने से क्या फायदा मेरे दोस्त!
रात जब गुजरेगी तो साली उतर जाएगी।
पीना ही है तो किसी की बेवफाई पीयो दोस्त !
कसम से सारी जिंदगी नशे में गुजर जाएगी।।

सुना है इश्क करने जा रहे हो? सुनो!
जिंदा तो आओगे पर जी नहीं पाओगे।

मैं हारता नहीं हूं कभी लफ़्ज़ों के सामने।
देख तन्हा खड़ा हूं तेरे वकीलों के सामने।।

भटकोगे तुम भी वफ़ा की तलाश में।
एक वक्त के बाद यह हुस्न ढल जाएगा।।

तो क्या हुआ जो आप नहीं मिलते हमसे।
मिला
रब भी नहीं मगर इबादत बंद नहीं की हमने।।

बड़ी मुख्तसर वजह है मेरे झुककर मिलने की।
मिट्टी का तो बना हूं गुरूर मुझपर नहीं जंचता।।

उड़ा दो हवा में सारी रंजिशें यारों।
दो पल की जिंदगी है कब तक नफ़रत करोगे।।

कड़वी दवाई नहीं पीते थे बचपन में जो कभी।
बच्चे बड़े क्या हुए इश्क में शराब पीने लगे।।

चलो हिसाब बराबर हुआ अब कोई गम नहींं!
मेरे पास तुम नहीं, तेरे पास अब हम नहीं।।

गुरूर कहाँ ठहरे, हममें "मैं" है ही नहीं,
तुम तो जो हो तुम हो, हम में "हम हैं ही नहीं" !

उसे बेवफ़ा जो बोलूं तो तौहीन-ए-वफ़ा होगी,
वो वफा निभा तो रहे है कभी इधर कभी उधर..!

वक्त आने पर खुलते हैं किरदार सारे,
पहली नजर में हर कोई वफादार लगता है।

तुम खाली होगे तो बताओगे हाल अपना!
मैं भीड़ में भी सोचता हूं कैसे होगे तुम।

यानी ये तड़पना भी कोई काम का नहीं ,
यानी मैं मर के बताऊं कि मैं दर्द में हूं ।

न आंख चुराके बात कर न आंखें दिखाके बात कर,
जब कभी तू साथ रहे तो बस मुस्कुराके बात कर।।

साफ दामन का दौर अब खत्म हुआ दोस्त ,
लोग अब अपने धब्बे पर गुरूर करने लगे हैं...।।

शरीक-ए-जुर्म न होते तो मुखबिरी करते।
हमें खबर है लुटेरों के हर ठिकाने की।।

मैंने सौ तरकीबें ढूंढ़ी होनी को भगाने की।
मगर वो इश्क था होकर ही माना ........!

हमने हर दौर में इंसान से ही मोहब्बत की।
दौलत भी हुई तो कुत्ता नहीं पाला हमने..।।

तुमने मेरी आत्मा की गरिमा को ललकारा था।
तुम्हें त्यागना हमारा अंतिम विकल्प बन गया।।

कब तक अपमान सहा जाए,
द्वन्द्व कहां तक पाला जाए।।
तूं भी तो राणा का वंशज है।
फेंक जहां तक भाला जाए।।

जिस देश के लोग शहीदों को भूल जाते हैं।
वह देश नये शूरवीरों को पैदा नहीं कर सकता।।

तेरे बगै़र मुकम्मल नहीं कोई भी महफ़िल,,,
तेरा ख़्याल मेरी हर ख़ुशी में शामिल है...!!❤️

मैं वह 'समझदार' हूं जिसे पता है कि,
किसने मुझे कितना बेवकूफ बनाया है।

वैसे कमी तुम्हारी तो है ही नहीं,
बात यह है कि वक्त हमारा नहीं है।

बिगड़ी जुल्फें, बढ़ी दाढ़ी, गुमशुदा हालात।
यार तुमने तो जुदाई का ढोल पीट दिया।।

उड़ने दो रंगों को इस बेरंग जिंदगी में।
एक त्यौहार ही तो हैं जो हमें रंगीन बनाते हैं।।

मेरे होंठों से हंसी के ढंग छीन लिए।
मेरी हथेली से लकीरों के संग छीन लिए।।
अब मैं होली मनाऊं भी तो मनाऊं कैसे?
एक लड़की ने मेरे चेहरे के सारे रंग छीन लिए।।
HAPPY HOLI BHAI LOG 2025

सोचा नहीं था मैंने कभी तेरे जैसा शख़्स,
मुंह फेर लेगा मुझको परेशान देख कर।

तुम कहीं से भी फिसलते तो संभाल लेते तुम्हे,
तुमने नज़रों से गिरना चुना तो हम क्या करें।

जिंदगी है चार दिन की कुछ भी ना गिला कीजिए।
इश्क मिले या बेवफाई कुछ भी हो मजा लीजिए।।

कोई मौसम हो दुख सुख में गुजारा कौन करता है।
परिंदों की तरह सबकुछ गवारा कौन करता है।।
घरों की राख फिर देखेंगे पहले देखना यह है।
घरों को फूंक देने का इशारा कौन करता है।।

तुम पढ़ते हुए मायूश हो जाते हो,
हमारा सोचो हम तो इसे लिखते हैं।

एक शख्स बैठा रहा मेरी हां की इंतजार में।
एक तो मेरे इजहार के बाद भी मुकर गया।।

हिचकियों में वफ़ा ढूंढ रहा था,
कमबख्त गुम हो गई दो घूट पानी से।

जाने किस मुंह से वो करता है पलट आने की बात,
क्या उसे छोड़ के जाने का सबब याद नहीं।

इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी,
लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे।

वफ़ा कर के भी जमाने में हम बुरे रह गए।
सब बदल गये हम रस्मों से जुड़े रह गए।‌।
तुम्हारे सपनों को मिल गया मुक़द्दर का साथ।
और मेरे ख़्वाब बेबस आंखों में अधूरे रह गए।।

हम जैसे लोग गलती से कभी जो ख़्वाब देखें तो,
ग़रीबी ख़्वाब के मुंह पे तमाचा मार देती है।

दवा की बोतलों में प्यार भरकर बेंचों यार,
लोग बिमारी से ज्यादा तन्हाई में मरे जा रहे हैं।

इस जिस्म को भी चाट गई सांस की दीमक।
मैंने उसे देखा था किसी वक़्त हरा भी।।

किसी किताब में रखी निशानियों की तरह।
जहां वो छोड़ गया था हम वहीं पड़े हुए हैं।।

नायाब होते हैं वो पुरूष जिनके किरदार की
खुश्बू पाकर और मोहब्बत का इजहार करती है।

दिल वाले तो हम भी थे मोहब्बत में दिल जला बैठे,
तकदीर ही ऐसी की एक बेवफा से दिल लगा बैठे।

रास्ता बन दीवार ना बन, कुछ लोगों से
बैर भी कर, दुनिया भर का यार ना बन।

अभिमान कहता है -- किसी की जरूरत नहीं।
अनुभव कहता है -- धूल की भी जरूरत पड़ेगी।।

बस धोखे खाते खाते हाय पी रहे हैं।
हम अपनी बर्बादी पर चाय पी रहे हैं।।

जन्म पर बंटी मिठाई, मृत्यु पर बंटी खीर।
कोई भी ना खा पाया, राजा रंक फकीर।।

गुनाह सबके याद है, मुस्कुराकर
मिलने को माफी मत समझ लेना।

मंजिल से गुमराह भी कर देते हैं कुछ लोग,
हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं लगता।।

खुद की समझदारी भी अहमियत रखती है,
वरना अर्जुन और दुर्योधन के गुरू तो एक ही थे।

बाबा मैंने तो अच्छा बनकर भी देखा है।
हमें तो लोग तब भी बुरा ही कहते हैं।।

कभी टूट कर बिखरो तो मेरे पास आ जाना।
मुझे अपने जैसे लोग बहुत अच्छे लगते हैं।।

ना हक दो इतना की तकलीफ हो तुम्हें,
ना वक्त इतना दो कि गुरूर हो उन्हें..!!

मोहब्बत छिपाने की अदा, यूँ बेकार हो गयी,
जुबां तो रही बस में, आँखें गद्दार हो गई..!!

एक नौकरी की तलाश में जब से निकले हैं लोग।
उन्हें गाँव की साँझ भी अब नसीब नहीं होती।।

बंद पड़ी हैं किताबें सारी पुस्तकालय की।
माहिर हो गए हैं लोग आजकल ज्ञान देने में।।

जो तुम शौक में करते जा रहे हो,
बढ़ते बढ़ते यह कभी गुनाह हो जाएगा।।

सवालों में एक सवाल यह भी है।
मुझमें सिर्फ मैं हूं या तूं भी है।।

धड़कने मिलाकर हम धुन बना लेते हैं।
सूरज डूब जाता है तो हम दिल जला लेते हैं।।

पत्थर नहीं हूं मैं मुझमें भी नमी है।
दर्द बयां नहीं करता बस इतनी सी कमी है।।

इश्क में मत पूछो हाल मुझ जैसे फकीर से।
जिंदगी बर्बाद है हाथ भरा पड़ा लकीर से।।

सर्दियों की धूप सा है इश्क उसका,
थोड़ी देर ही दिखे पर सुकून मिलता है।

रद्दी तक तोली जाती हैं बिकने से पहले।
तुम्हें कोई परख रहा है तो बुरा क्या है।।

हर किसी को चांद नसीब नहीं होता।
हर किसी को सितारा नसीब नहीं होता।।
किसी के पैर के नीचे बिछते हैं मखमल के गलीचे।
किसी को ओढ़ने को कफन तक नसीब नहीं होता।।

आप तो गैरों की बात करते हो -2
हमने अपने भी आजमाएं हैं।
लोग कांटों से बचकर चलते हैं,
हमने तो फूलों से जख्म खाए हैं।।

खामोशियां भी बयां करती हैं दिल के जज्बातों को,
बातें कभी लफ़्ज़ों की गुलाम नहीं होती।

मोहब्बत लिबास नहीं जो हर रोज बदल जाए।
मोहब्बत तो कफ़न है पहनकर उतारा नहीं जाता।।

हम पलटते नहीं बेजान किताबों के वर्क,
हम वो पढ़ते हैं जो चेहरे पर लिखा होता है।

फलक तक साथ चलने की दुआ कीजिए।
जो जिंदा हैं पहले उनसे वफ़ा कीजिए।।

Heartfelt Sad Shayari Hindi

तुम मुझे भूल जाओ तो ए हक है तुमको।
मेरी बात और है मैंने तो मोहब्बत की है।

उसने ही हमें खेल से निकाल दिया।
हम तो राजी थे हारने के लिए।।

सवालों में ही खत्म हो गए कई रिश्ते।
शायद कोई जवाब देता तो संवर जाते।।

अब क्या कहूं कि उम्र गुजरी है किस तरह।
यह भी कोई सवाल है, कुछ और बात कर।।

मुझसे ना मिल सकेगा किसी का मिजाज भी।
मुझको तो गुलाब भी काले पसंद हैं।।

बहुत सोच समझकर संगत करना फकीरों से।
ये वो हैं जो सूखी दरीया से पानी मांग लेते हैं।।

हालात इस कदर हम पर ज़ुल्म ढा रहे हैं।
हम दर्द सुना रहे तो लोग तालियां बजा रहे हैं।।

वो तेरा शहर, तेरे लोग, रिवायत तेरी।
तुम अगर गांव में होते तो हमारे होते।।

तुम अगर पास ना बैठो, तो मुदारत कैसी।
बस एक चाय के खातिर तो नहीं आए हम।।

अपने भी तुमको अपनो में अब गिन नहीं रहे।
मान जा भाई अब, शायद तेरे दिन नहीं रहे।।

अपनी ना कोई रानी है ना महारानी।
बस बापू महाराज और बाप महारानी।।

ठिठुर रहा है बदन, सांस थम सी गई।
आज ठंड बहुत है, तो शायरी जम सी गई।।

ज़र्रे ज़र्रे पर खुदा की निगाहें करम है।
ना तुम पर ज्यादा ना ही हम पर कम हैं।।

पागलों की तरह दर बदर घूमते फिरोगे।
मेरे बारे में लोगों से पूछते फिरोगे।।
याद आएंगी तुमको पुराने साल की बातें।
नए साल में भी मेरे जैसा ढूंढते फिरोगे।।

खुशियों को बेहद नफ़रत है मुझसे,
मैं तो अवसादों का यार हूं।
हो गए खुरदुरे सब पन्ने 2024 के,
अब जो भी हो 2025 के लिए तैयार हूं।।

जितने दुश्मन हमारी जान के हैं,
उसमें आधे तो हमारे खानदान के हैं।
कम से कम मुझमें उतने तो फल आ जाएं,
जितने एहसान मेरे बाग़बान के हैं।।

तू ए कहता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे,
अरे गौर से देख हर चेहरे में दिखाई देंगे।
हम तो महसूस किए जाते हैं खूश्बू की तरह,
कोई शोर नहीं हैं जो सुनाई देंगे।।

तन्हा गुजार लेते हैं दिन अपने,
शुकून की कभी शाम नहीं होती।
यकीन ना करना हाथों की लकीरों पर दोस्त,
लकीरें किसी काम की नहीं होती।‌।

तसल्ली से पढ़ा होता तो समझ में आ जाते,
कुछ पन्ने बिना पढ़े ही पलट दिया तुमने।

सर उठाकर चलने के लिए,
वजूद बेदाग रखना पड़ता है।

हम भी जरूर आएंगे तेरी शादी में - 2
यह देखने कि तकदीर वाले कैसे होते हैं।

अपनी हालत का मुझे ध्यान नहीं होता है,
इश्क सच्चा हो तो आसान नहीं होता है।
पहले से बढ़कर मुहब्बत है तुमसे अब,
क्यों तुमको यकीन मेरी जान नहीं होता है।।

सर बुलंदी का एक ओजीफा है,
जो बुजुर्गों से हमने सिखा है।
खुद को छोटा समझते रहिएगा,
यह बड़ा बनने का तरीका है।।

थोड़ी सी 'खुद्दारी' भी तो लाज़मी था,
जिसने भी हाथ छुड़ाया; छोड़ दिया।

गम बहुत हैं मगर खुलासा कौन करे।
मुस्कुरा देता हूं अब तमाशा कौन करे।।

जब तक घोड़ा रेस जीतता है,
मालिक को चने महंगे नहीं लगते।

चुप हूं किसी वजह से जिस दिन बरस जाऊंगा,
उस दिन किसी पर तरस नहीं खाऊंगा।

गांव का देखकर गंवार मत समझना,
हम फैशन पर नहीं इज्जत पर मरते हैं।

खूबसूरती से धोखा न खाइयो हुकूम,
तलवार खूबसूरत हो भी तो मांगती खून ही है।

ये देखकर कि आंख हमारी नम है,
तू कहता ही रहा कि गुनाहगार हम हैं।
गलती तेरी नहीं है, तेरे शहर में तो,
वफादार लोगों की तादाद ही कम है।।

जिंदगी में जिसे लोग मरहम-ए-गम जानते हैं,
जैसे हमने गुजारी है हम जानते हैं।।

मुझमें कोई शिकवा या शिकायत नहीं,
शायद मेरे नसीब में तेरी चाहत नहीं।
मेरी तकदीर लिखकर खुदा भी मुकर गया,
मैंने पूछा तो ये बोला ये मेरी लिखावट नहीं।।

माना की आग नहीं था फेरे नहीं थे,
इसका मतलब की हम तेरे नहीं थे।

कल रात तेरी यादों में तेरी तस्वीर बना डाली,
इतनी अच्छी लगी की गले से लगा डाली।
जब खौफ हुआ कि कोई चुरा ना ले,
हम इतनी रोए कि आंसुओं से मिटा डाली।।

इस अंजुमन में आपको आना है बार बार,
दीवार-ओ-दर को गौर से पहचान लीजिए।

कटी हुई टहनियां कहां छांव देती हैं,
हद से ज्यादा उम्मीदें हमेशा घाव देती हैं।

जिस दिन तुम मां बनोगी मेरी जान,
उस दिन लड़के खिलौने नहीं सोने लगेंगे सोने।

इस दौर-ए-तरक्की में हर काम है मुमकिन,
हैरत नहीं कि बाज़ कबूतर से डर गया।
और यह भी खबर थी आज के अखबार में छपी,
इंसान के काटने से कल एक सांप मर गया।।

बहुत बेहतर समझता है जो मतलब जिंदगानी का,
लुटा देता है बच्चों पर हर एक लम्हा जवानी का।
और भुलाया जा नहीं सकता किरदार मां का भी,
पर असल हीरो तो बाप है हर कहानी का।।

मैं जहां भी जाऊं उसकी याद सताती है,
भुला भी नहीं सकता जो उसकी याद आती है।

कभी मुश्किल से तो कभी आराम से होगी,
तेरी इज्जत जमाने में माना कि काम से होगी।
तू दौलत और शोहरत चाहे कितनी भी कमा ले, पर
तेरी पहचान तेरे बाप के ही नाम से होगी।।

तकलीफ़ हमारी गर तुम जान गये होते।
अब तक नाराज़ ना रहते मान गये होते।।

जान कहने से कोई जान नहीं होता है,
कोई कह भी दे तो नुकसान नहीं होता है।
वो तो मैं हूं जिसे छोड़ दिया छोड़ दिया,
वरना यह फैसला आसान नहीं होता है।।

अहम् की अकड़ ज्यादा चल नहीं सकती,
मौत की घड़ी कभी टल नहीं सकती।
लूट कर दौलत भले ही जमा कर लो,
पर पाप की कमाई कभी फल नहीं सकती।।

आसमानों को जमीनों से मिलाने वाले,
झूठे होते हैं ये तकदीर बताने वाले।
अब तो मर जाता है रिश्ता ही बुरे वक्तों पर,
पहले मर जाते थे रिश्ते को निभाने वाले।।

कभी तो खोद कर देखो क़ब्र अपने जिस्म की;
मिलेंगी ख़्वाहिशें जिन्हें तुम अंदर मार देते हो...!

परत-दर-परत मेरा दर्द ना कुरेदो, थक जाओगे।
हर परत में मेरा तजुर्बा मेरी उम्र से बड़ा पाओगे।।

करता नहीं है ख्याल मेरा इस ख्याल से,
तंग आ गया अगर तूं मेरी देखभाल से।
चल मेरे साथ और तबियत की फ़िक्र छोड़,
दो मिल दूर है मेरा घर अस्पताल से।।

अगली बार आना तो हाथ ना मिलाना,
तुम थाम नहीं पाओगे हम छोड़ नहीं पाएंगे।

मजबूरियों के नाम से सब छोड़ना पड़ा,
दिल तोड़ना कठिन था मगर तोड़ना पड़ा।
मेरी पसंद और थी सबकी पसंद और,
इतनी जरा सी बात पर घर छोड़ना पड़ा।।

ज़हर के काबिल भी ना थे कुछ लोग,
अफ़सोस हम उन्हें चाय पिलाते रहे।

कोई इतना अमीर नहीं कि पुराना
वक्त खरीद सके, कोई इतना गरीब नहीं
कि आने वाला वक्त ना बदल सके।।

तन्हाई मेरी किसी को समझ ही नहीं आई,
मुझे हथियाने में लगे रहे सब तेरे जाने के बाद।

ख़ामोशी गलत फैसला कर देगी,
बोलिए वरना मसला हो जाएगा।

खुदा ने यह सिफ़त दुनिया के हर औरत को बख्शी है, कि वो पागल भी हो जाए तो बेटे याद रहते हैं।

ज्यों ज्यों सूरज की ओर बढ़ता गया,
उतना ही वो दूर होता गया।
वो डर कर भाग रहा है मुझसे,
इसी अहंकार में मैं चूर होता गया।।

Emotional Sad shayari in hindi

अपनी लिक्खी हुई तकदीर पर हंस लेते हैं,
दिल के जज्बात को जंजीर से कस लेते हैं।
ये तो मेरा तजुर्बा है कि वक्त आने पर,
सांप तो सांप है पर इंसान भी डंस लेते हैं।।

रक्खा है बाजुओं पर सदा अपने ऐतबार,
ताकत किसी का देखकर सयदा नहीं हुए।
मक़्सद है जिंदगी का हमारी तो जितना,
हम हारने के वास्ते पैदा नहीं हुए।।

दिल के अरमानों को जलाकर राख कर देगी,
तेरी जिंदगी को भी एक दिन ख़ाक कर देगी।
ये रात-रात भर जागकर जिससे बातें करता है दोस्त,
एक दिन ए नागिन तुझे बर्बाद कर देगी।।

काश उसका कहीं जिया ना लगे,
और उसको भी कारण का कुछ पता ना लगे।
और उसी के ऐब सुनाना है उसी को,
इस कदर की उसे कुछ बुरा भी ना लगे।।

सामने गैर के घुटने भी टिका सकता है,
ऐन मौके पर वो पीठ भी दिखा सकता है।
अब हमें करना है दस्तार बचाने का सफ़र,
जान जिसे प्यारी है वो जा सकता है।।

कहीं मेरा दिल सफेद रंग का तो नहीं,
जो भी दाग लगता है उतरता ही नहीं।

जहां तेरी याद ना आए वो तन्हाई किस काम की,
बिगड़े रिश्ते ना बना दे वो खुदाई किस काम की।
बेसक हमें जाना है अपनी मंजिल तक, मगर
जहां से अपने ना दिखाई दें वो ऊंचाई किस काम की।।

उसके दिल में सुई की तरह खटकते रह जाओगे,
दर-बदर पागलों की तरह भटकते रह जाओगे,
वो दुल्हन बन किसी अफसर संग निकल लेगी दोस्त,
तुम कमरे में किसी पंखे से लटकते रह जाओगे।।

भला कब एक जैसी हर किसी की बात होती है,
हर एक इंसान की अपनी अलग औकात होती है।
किसी के बोलते ही फूल झड़ने लगते है, तो
किसी के बोलते ही ज़हर की बरसात होती है।।

कपड़े फट जाते हैं और बाल बिगड़ जाते हैं,
अच्छे अच्छों के यहां हाल बिगड़ जाते हैं।
कि हसीन के चक्कर में जो पड़ गया है तू,
ये वो चक्कर है कि कई साल बिगड़ जाते हैं।।

बागवान की गुलाब से दोस्ती थी,
मतलब उसे किसी नायाब से दोस्ती थी।
सबके हिसाब से हममें प्यार था,
बस उसके हिसाब से हमसे दोस्ती थी।।

"तलब भी उसी की है.. नशा भी उसी का है..
उसे सब ख़बर है... फिर भी वो बेख़बर है"..

मेरा बस नहीं चलता मैं बातें छोड़ दूँ करनी
मैं ख्वाबों को ज़हर दे दूँ, मैं आँखें नोच लूँ अपनी!!

रेल की पटरी की तरह हैं हमारे रास्ते,
साथ चलेंगे मगर मिलेंगे नहीं।
फिर भी उम्मीद यही होगी कि कहीं एक मोड़ पर,
हम फिर साथ चलेंगे जैसे कभी बिछड़े ही नहीं।।

एक रोज मार ही देगा मेरा गुजरा हुआ कल,
अपने ही गुनाहों का बोझ अब नहीं उठाया जाता।

कर रहे थे महफ़िल में वफाओं की बात,
हमने जैसे ही जूता उतारा सब चुप हो गए।

मोहब्बत में पड़ गए हो और इज्ज़त भी चाहते हो!
यार ग़ालिब तुम अभी बड़े नादान हो,
जहर भी खाना है और जिंदगी भी चाहते हो।

हमारे साथ बचपन से ही ऐसा होता है। जब जब पैसा जमा किए मनपसंद का खिलौना बिक गया।

जवानी की अकड़ में तेज खाकर बात करता हो,
बुढ़ापे को सदा नीचा दिखाकर बात करता हो।
खुदाया छिन ले उस शख्स के आंखों से रोशनी,
जो अपने बाप को आंखें दिखाकर बात करता हो।।

किसी का होना तो लाखों का ख़्वाब होता है,
पर इसमें कोई कोई कामयाब होता है।
और खराब होती है नियत अगर मैं कुछ न कहूं,
अगर कुछ कहूं तो फिर ताल्लुक खराब होता है।।

हर ऐब गरीबी से जुड़ा है। दौलत दलालों को भी ईमानदार बना देती है।।

सामने हो मंजिल तो रास्ता मत मोड़ना।
जो भी हो मन में वह सपना मत तोड़ना।।
हर कदम पर भले मिलें मुश्किलें आपको।
बस सितारे छूने के लिए जमीन मत छोड़ना।।

गुनाहों का हिसाब मुझसे मत मांग मेरे मालिक!
कलम तो तेरी ही चली थी मेरी तकदीर लिखने में।

तेरे जाने के बाद क्या कुछ नहीं हुआ।
तुझे क्या लगा यार; मुझे दुख नहीं हुआ।।

कुर्सी है तुम्हारा कोई जनाजा तो नहीं है,
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते।

बड़ा बारीक नुक्ता है अगर समझ पाओ तो।
सुकरात जहर ग़र ना पीता तो भी मर जाता।।

पांव के लड़खड़ाने पर नजर तो सबकी है।
सिर पर कितना बोझ है कोई नहीं देखता।।

उजड़ गया वो रिश्ता दुबारा नहीं बसेगा। तुझे माफ
तो कर देता, पर तूं सांप है, दोबारा डसेगा।।

प्रश्नपत्र सी है जिंदगी जस की तस स्वीकार्य,
कुछ भी वैकल्पिक नहीं सभी प्रश्न अनिवार्य।

कोई ठुकरा दे तो हंस के जी लेना दोस्त !
मोहब्बत की दुनिया में जबरदस्ती नहीं होती।

ख़ामोश रहूं तो मुश्किल है,
कह दूं तो शिकायत होती है।

एक जाहिल के साथ तख्त पर बैठने से तो अच्छा है, किसी ज्ञानी के साथ फर्श पर बैठना।

ऐ वक्त कभी फिर से वो जमाने लाओ,
हमसे मिलने वही लोग पुराने लाओ।

नहीं बदल सकते हम खुद को औरों के हिसाब से,
लिबास तो हमें भी दिया है खुदा ने अपने हिसाब से।

नजर का कोई ताल्लुक नहीं है ख्वाब के साथ,
जब जब उसको देखा ऐनक उतार ली हमने।।

गलती मानने के लिए बहादुर होना पड़ता है,
और बहस करने के लिए बदतमीज।

ना किसी की बुरी नज़र, ना किसी का मुंह काला;
होगा वही जो चाहेगा ऊपर वाला।।

मजबूत तरीन होते हैं वो रिश्ते,
जहां ऐब गिने नहीं छुपाए जाते हैं।

बिछाकर जुल्फ गालों पर सितम आबाद कर डाला, हसिनाओं ने जिसे चाहा उसे बर्बाद कर डाला।।

इतना तो असर होगा हमारी यादों का, हमारे ना होने पर भी तुम याद करके मुस्कुराओगे।

जिसको अपना जान माना, इज्जत दी, उसको ऐसे बदनाम थोड़ी ना कर देंगे। वो चाहे जिसपर दिल लुटाए, बस इतनी सी बात पर उसका नुकसान थोड़ी ना कर देंगे।। वो गलत भी है तो बैठा है न वो मालिक हिसाब करने, वो ऐसा है वैसा है, यह सब कहकर अपनी जुबान खराब थोड़ी ना कर देंगे।।

कोई नहीं है हमारा यह सोचकर नहीं जाते, अकेलेपन और तन्हाई से बिछड़कर नहीं जाते। बेरोज़गारी का ताना देकर जिन्हें निकाला गया था घर से, वो बेटे त्यौहारों पर भी घर नहीं जाते।।

कि लाख कसम खाई मगर एकर विश्वास ना बन पईबा, रिचार्ज करावत करावत गरीब हो जईबा मगर एकर खास ना बन पईबा। और तोहरे सामने पढ़के ई ANM-GNM कर लेई, और तू एकरे प्यार के चक्कर में हाईस्कूल पास ना कर पईबा।।

जो सीधा दिल को चीर दे बात ऐसी भी बोल दूं, जो दिल में छुपा रखे हैं राज सारे वो खोल दूं। मुझको नाकाम आवारा कहकर छोड़ने वाली लड़की, मैं चाहूं तो तेरे सौहर को नोटों से तौल दूं।।

कि जितना कम दुनिया से वास्ता होगा,
उतना ही खूबसूरत जिंदगी का रास्ता होगा।

पूछ कर मेरा पती वक्त ज़ाया ना करो,
मैं तो बंजारा हूं ना जाने किधर जाऊंगा।।

तुम्हें मदद के लिए जब दुहाई देने लगा,
तुम्हारी आंख में क्या था दिखाई देने लगा।
चला था जिक्र मेरी खामियों का महफिल में,
जो लोग बहरे थे उनको भी सुनाई देने लगा।।

मेरे खिलाफ तो अदालत भी था जमाना भी,
मुझे तो जुर्म बताना भी था और छुपाना भी।
और अबकी बार तो ऐसे कमान खींची है,
कि तीर ले उड़ा शाना भी निशाना भी।।

महफ़िल में हंसना मेरा मिज़ाज बन गया,
तन्हाई में रोना एक राज बन गया।
दिल के दर्द को चेहरे से ज़ाहिर ना होने दिया,
यही मेरे जीने का अंदाज बन गया।।

गलतियां भी होंगी और गलत भी समझा जाएगा, यह जिंदगी है जनाब, यहां तारीफें भी होंगी और ज़लील भी किया जाएगा।

मेरे लुटने तक मेरे मिटने तक, वो सितम पर सितम सिर्फ ढाती रही। मैं तड़पता रहा उसकी चाहत के खातिर, और गैरों की बाहों में मुस्कुराती रही।।

हम मेहमान नहीं रौनक-ए-महफ़िल, मुद्दतों याद रखोगे कि जिंदगी में कोई आया था।

भिन्न - भिन्न किरदार मेरे, मैं..
बदनसीबी और प्यार का मारा हूं।
कोई कहता है शायर मुझको तो
किसी कि नज़र में आवारा हूं..।।

वो पूरी की पूरी दुनिया थी, जो मुझे ताउम्र ज़हर पिलाती रही। ईश्वरीय कार्य करने में संलग्न, मुझे नीलकंठ बनाती रही।।

वो एक पूरा खुद में शहर लिए बैठा है, वो एक शख्स मेरे लिए अपने अंदर ज़हर लिए बैठा है।

नाराज तो औरतें हुआ करती हैं, मर्द तो मुस्कुराकर महफ़िल छोड़ दिया करते हैं।

तरसे जो बरसों एक गुलाब की खातिर,
कब्र पर तो गुल - दस्ते हजार मिले।
जीते जी तो एक यार मिल ना सका,
सांसें थम गयी तो पूरे जहां में दिलदार मिले।।

वापस ले आया डाकिया चिट्ठी मेरी,
बोला; पता तो वही है पर लोग बदल गए।

फासला भी जरूरी था चिराग रोशन करते वक्त,
यह तजुर्बा हासिल हुआ जब हाथ जल गया।

कुछ देर बैठ गया मैं रईसों की महफ़िल में,
ऊंचे ऊंचे ख्वाबों ने तो चाल चलन बदल दिया।

पढ़ लिखकर खामोश हो तो कलम को तोड़ दो, ग़र हिन्दुत्व के लिए एक शब्द ना लिख सको तो सोशल मीडिया छोड़ दो।

सुना है यहांँ शायर बहुत है कोई,
हमें भी सुनाओ हम घायल बहुत हैं।

किस्से तो मोहब्बत के हमारे भी थे !!
पर अधूरी कहानी सुनता कौन है !!

मोहब्बत को दफा किया हमने,
अपनी कहानी में खुद को बेवफा किया हमने।
रूह कांप जाती थी जिनके दूर जाने के ख्याल से,
उनको हंसकर अलविदा किया हमने ....!!!

Best Life Teaching shayari

उन्हें गुरूर है क्योंकि उनका वक्त बोल रहा है
हमें यकीन है हमारा सब्र बोलेगा ......!!

उससे टकराकर मर गयी तितली,
किसी ने दीवार पर जो फूल बना रक्खा था।

वो अजनबी ही रहे तो अच्छा है, सुना है अहमियत खो जाती है अक्सर मुलाकात के बाद।

उन्होंने हमें देखकर जब मुंह मोड़ लिया,
तो तसल्ली हुई चलो पहचानते तो हैं।

चलेगा मुकदमा आसमान में सभी आशिकों पे,
जिसे देखो अपने महबूब को चांद जो बताता है।

आज से हम बदलेंगे रास्ता ऐ जिंदगी,
राब्ता सबसे होगा पर वास्ता किसी से नहीं।

इंसान की सोच ही उसे बादशाह बनाती है।
डिग्रियां हर किसी के पास होना जरूरी तो नहीं।।

सजा न दे मुझे बेकसूर हूं मैं,
थाम ले मुझको गमों से चूर हूं मैं।
तेरी दूरी ने कर दिया है पागल मुझे,
और लोग कहते हैं कि बहुत मगरूर हूं मैं।।

तुझसे नाराज़ होने पर जताएंगे नहीं,
हम तेरे शहर आएंगे पर बताएंगे नहीं।

नींद में भी गिरते हैं मेरे आंखों से आंसू,
और तुम ख्वाबों में भी मेरा हाथ छोड़ देते हो।

तबियत क्या बिगड़ी मेरी लोगों ने नम्बर ले लेकर काल लगाया, और जिसका नम्बर मुझे मुंह जुबानी याद था एक उसी का काल नहीं आया।

बुरा यह नहीं लगा कि तुम्हें अजीज कोई और है,
बुरा तब लगा जब हम नजरअंदाज किए गए।

ओ मेरे सुख धीरे-धीरे गा अपना मधुर राग।
ऊंचे स्वर में सोयी पीड़ा जावे कहीं ना जाग।।

भूख से मुरझाए चेहरे घर में कब तक देखता,
फाड़कर डिग्री मुझे मजदूर होना पड़ा।।

फूलों से फूलों का हाल पूछते हो,
मगर काटों को हर बार क्यों छोड़ देते हो तुम,
हम हर बार तो तुम्हें मुस्कुराकर ही देखते हैं,
हर बार हमारा दिल क्यों तोड़ देते हो तुम?

इश्क के अलावा कई और भी गम हैं जमाने में,
उम्र गुजर जा रही सरकारी नौकरी पाने में ।

जुबान खराब नहीं विचार कड़क हैं,
रंगों में नहीं जनाब संस्कारों में फर्क है।

अजीब मुकाम से गुजरा है काफिला मेरा,
सुकून ढूँढने चले थे नींद गवां बैठे।

सच्ची है मोहब्बत मेरी चाहे आजमाकर देख लो,
यकीं नहीं तो मुझपर जुल्म ढ़ा कर देख लो।
बदलेगा नहीं मेरे मोहब्बत का रंग कभी भी,
चाहे जितनी बार हो दिल दुखा कर देख लो।।

फैक्ट्री गोदाम कोठी मिल मशीनें बिक गयी,
जेब कॉलर बिक गयी और आस्तीनें बिक गयी।
खाली बोतल बेचने वालों ने ले ली जायदाद,
और पीने वालों की तो जमीनें बिक गयी।।

सूखे पत्तों की तरह बिखरे हुए थे हम,
किसी ने समेटा भी तो सिर्फ जलाने के लिए।

संभल के बसाएं आंखों में किसी को,
जो गहराईयों को नापते हैं छलकते भी वही हैं।

ग़र सौ बार उतरेगा केचुली अपनी,
जो सांप से पैदा है वो सपोला ही रहेगा।
और दौलत से फक़त हो सकती है जेब ही भारी,
ग़र हल्का है खून तो हल्का ही रहेगा।।

किसी को धोखा देकर यह ना सोचो कि वह कितना बेवकूफ है, बल्कि यह सोचो कि उसे तुम पर कितना भरोसा था।

मेरी सांसों में समाया भी बहुत लगता है,
और वही शख्स पराया भी बहुत रहता है।
और उससे मिलने की तमन्ना भी बहुत है,
लेकिन आने जाने का किराया भी बहुत लगता है।।

हमारे खातिर तुम कुछ कर ना सके यह गम ना करना, हमारे बारे में आपने सोचा बस यही काफी है।

किसी भी सूरत किसी रंग में जीत लेता है,
मैं उस लड़की को किसी ढंग में जीत लेता।
अगर वो होती किसी रियासत की शहजादी,
मैं तलवार उठाता और उसे जंग में जीत लेता।।

पैसा कुछ नहीं होता, ऐसा कहने के लिए भी
प्राय: बहुत पैसा होना चाहिए।

और तेरे प्यार पर लानत तेरे ऐतबार पर लानत,
मैने जो किया उस इन्तिज़ार पर लानत। और
दुनिया में होते हैं एक शक्ल के कई लोग, पर
तेरी फितरत के जैसे उन छिनार पर लानत।।

शुरुआत में ख्वाब तुमको प्यारे-प्यारे दिखाएगी,
उसके बाद तुमको फिर अपने रंग सारे दिखाएगी।
मोहब्बत में जिसको तुम अपना चांद बता रहे हो,
एक दिन वो लड़की तुमको दिन में तारे दिखाएगी।।

हर तरफ घात में बैठे हैं यहां दुशासन,
वीर अर्जुन जैसा लड़ाईया नहीं आने वाला।
खुद तुम्हें दुर्गा के अवतार में ढ़लना होगा,
घोर कलियुग है कन्हैया नहीं आने वाला।।

दुश्मन मेरी 'शिकस्त' पर मुंह खोलकर हंसें।
और दोस्त अपने 'जिस्म' के अंदर उछल पड़े।।

यह जो बुराइयां दिखती है मुझमें, यकीन
मानो बहुत सी अच्छाईयों के बाद आयी हैं।

समझ लेते थे पहले लोग अक्सर दिल की बातें भी,
मगर अब बोलने पर भी सुनाई क्यों नहीं देता ।
और सभी करते हैं दावे यूं तो अपनेपन की, पर
किसी रिश्ते में अपनापन दिखाई क्यों नहीं देता ।।

दिल के काले मिले और जहन के नापाक मिले,
मैनें चाहे थे समझदार वो चालाक मिले।
और दुश्मनों का तो भला जिक्र करूं क्या,
दोस्त भी तो मुझको दुश्मनों से खतरनाक मिले।।

कैरियर की चिंता भी अजीब होती है यार,
हंसते हुए चेहरे से रौनक छीन लेती है।

हाथ में पकड़े मोबाइल की अहमियत,
पास में बैठे इंसान से ज्यादा हो चुकी है।

जागे वो हैं तो सोए हम भी नहीं हैं,
गलत हम हैं तो दूध का धुला कोई भी नहीं।

इज्जत मैटर करती है जनाब वरना,
फालोवर्स तो _____________ के भी होते हैं।

खैरात में दे आया हूं जीती हुई बाजी,
दुनिया ये समझती है कि हार गया हूं मैं।

उम्र को हराना है तो शौक जिंदा रखिए,
जिंदगी का क्या आज है तो कल नहीं।

हम तो पहले से ही बदनाम है जनाब,
फ़िक्र वो करें जो दूध से धुले हैं।

कर्म ध्यान से कीजिए जनाब !
ना किसी की दुआ खाली जाती है ना बद्दुआ।

उठना बैठना साथ नहीं हो रहा, इसका मतलब;
ये नहीं कि मैं तुम्हें भूल गया मेरे दोस्त।

कुछ.. लोग.. तो; कहेंगे...,
वरना.... जिंदा.. कैसे रहेंगे..।

घोलिए जहर ना ज्यादा भी; सोचिए,
ग़र खुद पीना, पड़ गया तो फिर।

परिणाम तो चाहे जो भी हो, पर प्रयास हमेशा लाजवाब होना चाहिए।

झूठ बोलने के लिए जुबां चाहिए,
पर सच बोलने के लिए आंखे ही काफी हैं।

जीवन में जितनी संतुष्टता है उतनी ही खुशी है,
और जितनी खुशी है उतना ही हल्कापन है।

खुद को अर्पण कर दिया तेरी कश्ती में।
मैं मगन हूं भोलेनाथ तेरी ही भक्ति में।।

मुझे बहस से नफरत है क्योंकि मुझे पता है कि अगर मैंने अपना मुंह खोला, तो मैं नियंत्रण खो दूंगा।

आखिर तुम भी उस आइने की तरह ही निकले, जो भी सामने आया, उसी के हो गए।

बहुत संभालकर रक्खा था इस दिल को जमाने से,
लगता है यह चोरी हो जाएगा आपके मुस्कुराने से।

तुम्हीं से सीख रहा हूं हुनर नजर अंदाजगी का,
जो तुम पर आजमाऊं तो मतलबी ना समझना।

शौक नहीं था मैडम तुमसे इश्क करने का,
लेकिन इशारा भी तो तूने ही किया था।

भरोसा उठ गया प्यार के नाम से, साली;
अपनी भी रानी किसी और की दिवानी निकली।

ये चंद मयखाने ही हैं जो दर्द से मरने नहीं देते।
वरना कई इश्क के मारे खुदकुशी कर लेते।।

गजब की धूप है मेरे शहर में फिर भी,
लोग धूप से नहीं बल्कि मुझसे जल रहे हैं।

यूं ना खींच मुझे अपनी तरफ बेबस करके, ऐसा
ना हो खुद से बिछड़ जाऊं और तू भी ना मिले।

कसूर तो इन निगाहों का था,
जो चुपके से दीदार कर बैठी।
हमने तो खामोश रहने की ठानी थी,
कम्बख़त जुबान ही इजहार कर बैठी।।

जिंदगी सुंदर है पर जीना नहीं आता।
हर चीज में नशा है पर पीना नहीं आता।।
सब मेरे बगैर जी तो सकते हैं लेकिन,
मुझे ही किसी के बगैर जीना नहीं आता।।

हम भी तुम्हारी हर चाल से वाकिफ हैं मोहतरमा।
जिंदगी का एक हिस्सा जो हरामियों में गुजारा है।।

सही हो कर भी गलत होना आसान लगा मुझे,
क्योंकि खुद को साबित करना कठिन लगा मुझे।

अगली बार जब कोई पूछेगा मोहब्बत है तुमसे।
तब तो हम यही पूछेंगे की कब तक चलेगी।।

बहुत ही LOYAL बनती थी ओ,
अपने हर X की इच्छा पूरी करती थी।

ताल्लुक बरकरार रखना हो तो अच्छाई बखान करो, ताल्लुक खत्म करना हो तो सच्चाई बयान कर दो।

छोटी सी जिंदगी है अरमान बहुत हैं,
हमदर्द नहीं कोई इंसान बहुत हैं।

दिल का दर्द सुनाएं तो किसको सुनाएं,
जो दिल के करीब हैं वो अनजान बहुत हैं।।

लोग बुरे नहीं हैं "महोदय__"
आप हद से ज्यादा अच्छे हैं।

बिना खोए कुछ नहीं मिलता ऐ दोस्त,
जन्नत भी तो जान मांगती है।

रूखसत-ए-यार का मंजर भी क्या मंजर था,
हमने खुद को खुद से बिछड़ते हुए देखा।

मर्द ने जब जब क़लम उठाई,
औरत को खूबसूरत, चांद और बेदाग लिखा।
औरत ने जब जब कलम उठाई,
मर्द को झूठा, बेवफा और मक्कार लिखा।।

यह खुदगर्जियों का दौर है,
बचपन की कोई कहानी नहीं।
दिलों में अब नफ़रत भरते हैं लोग,
पक्षियों के लिए घड़ों में पानी नहीं।।

जिंदगी ने सवाल बदल डाले,
वक्त ने हालात बदल डाले।
हम तो आज भी वही हैं जो कल थे,
बस लोगों ने अपने जज्बात बदल डाले।।

ध्यान से पक्षियों को देते हो दाना पानी,
ग़र इतने अच्छे हो तो रिहा क्यों नहीं करते।

थोड़ा महंगा पड़ा औरों के लिए जिंदगी जीना,
उम्र खर्च भी हुई, कुछ हाथ भी नहीं लगा।

लौट कर नहीं आएंगे अब तेरी जिंदगी में,
शौक से रखो सिलसिला मुझे नजरअंदाज करने का।

केमेस्ट्री पढ़कर भी लोग नहीं समझते कि,
जब नया बांड बनता है तो पुराना टूट जाता है।

रवैया बहुत खराब है अभी मेरे हालातों का,
लोग जल्द बुरा मान जाते हैं हमारी बातों का।

क्या खाक तरक्की की है इस दुनिया ने,
इश्क के मरीज तो आज भी बे-इलाज हैं।

मैंने भगवान से शक्ति मांगी,
उन्होंने मुझे मुश्किल हालात में डाल दिया।

आज ना सही तो कल किया,
पर आलसियों ने तो बस कल - कल किया।

आजमाना अपनी यारी को पतझड़ में मेरे दोस्त,
सावन में तो हर पत्ता हरा नजर आता है।

दुखों में लिपटे हुए लोग,
दुआएं बड़ी कमाल की देते हैं।

अगर तेरी खामोशी एक मजबूरी है,
तो रहने दे इश्क भी कौन सा जरूरी है।

जिस पर बीतती है उसी को पता होता है,
कि टेंशन भी क्या गजब की चीज होती है।

ना कोई खुशी ना ही है कोई गम,
जिस तरफ ले जा रही जिंदगी, उधर जा रहे हम।

मैं किसी से नाराज़ नहीं हूं बस परेशान हूं खुद से,
मुझसे मेरे ही जिंदगी के मसले नहीं सुलझ रहे।

याद है टीचर कहा करती थी,
खाना खाना तो नहीं भूलते होगे।
अब उन्हें कोई जाकर बताएं,
हां ! अब खाना खाना भी भूल जाता हूं।।

यादें बनकर जो तुम साथ रहते हो मेरे,
इस एहसान के लिए सौ बार शुक्रिया।।

दोस्त भी जरूरी हैं जिंदगी की भीड़ में,
बिखर जाने पर महबूब समेटने नहीं आते।

इच्छाओं की सड़क तो बहुत दूर तक जाती है,
बेहतर है कि हम जरूरतों की गली में मुड़ जाएं।

रातों में नींद नहीं आती ठीक से खाया भी नहीं जाता,
दिल में बहुत कुछ है मगर बताया भी नहीं जाता।

उतार कर फेंक दी उसने तोहफे में मिली वो पायल,
उसे डर था कि छनकेगी तो याद जरूर आऊंगा।

जाते जाते वह बात ही कुछ ऐसी बोली की फिर,
मुझे अपनी ही पसंद से नफरत हो गयी।

सताया ना कर इस बदनसीब इंसान को ऐ जिंदगी,
जिसको लोग चाहते तो है मगर जरूरत पड़ने पर।

मुफ्त में नहीं सीखा उदासी में मुस्कुराने का हुनर,
बदले में जिंदगी की हर खुशी तबाह की है।

मुलाकात जरूरी है अगर रिश्ते निभाने हो,
लगाकर भूल जाने से पौधा भी सूख जाता है।

वही ताज है, वही तख़्त है,
वही ज़हर है वही जाम है।
ये वही ख़ुदा की ज़मीन है,
ये वही बुतों का निज़ाम है।।
बड़े शौक़ से मिरा घर जला पर,
कोई आँच तुझ पे न आएगी।
ये ज़बाँ किसी ने ख़रीद ली
ये क़लम किसी का ग़ुलाम है।।

तरस कर मिलने वाली चीज ___ मुर्शद!
अक्सर बाद में नफ़रत के काबिल होती है।

यही तो जिंदगी है दोस्त,
जीना सिखाए बिना ___ मरने नहीं देती।

सुबह से शाम हो गई लड़ते लड़ते, और
टापिक यह तो कि तुम बात क्यों नहीं करते।

खुद की ही तलाश में हूं आजकल मैं तो,
मुझे आवारा कहने वाले तेरी बातों में दम था।

अपना तो वो है जो किसी और के लिए
तुम्हें कभी नजरअंदाज ना करें।

उबलते वक्त तो पानी सोचता होगा जरूर,
अगर बर्तन ना होता तो बताता आग को।

बर्फ का वो शरीफ टुकड़ा जाम में क्या गिरा, बदनाम हो गया। देता जब-तक अपनी सफाई,
वो खुद श+राब हो गया।।

औकात नहीं थी जमाने में जो मेरी कीमत लगा सके ग़ालिब। कम्बख़त इश्क में क्या गिरे,
मुफ्त में नीलाम हो गए।।

कल तक सभी के साथ बड़ा 'मेल जोल' था,
बिगड़ा जो वक्त आज 'बे मेल' हो गए।
हर इम्तिहान पास किया जिंदगी का पर,
रिश्तों में तुम्हें परखने में हम 'फेल' हो गए।।

आपको दिल दिया है हमने नेक समझकर,
कहीं खा मत जाना आप उसे केक समझकर।

गिरा दे जितना पानी तेरे पास है ऐ बादल,
ये प्यास तो चु __ने से जाएगी तेरे बरसने से नहीं।

फकिराना तबियत है, मिले तो बांट देते हैं।
हमसे मुस्कुराहटों की जमाखोरी नहीं होती।।

फरमाइशें सिर्फ घर पर ही चलती थी साहब!
जब खुद बनाने लगे तो दाल भात भी खाने लगे।

सुना है जिंदगी इम्तिहान लेती है,
यहां तो इम्तिहान ने पूरी जिंदगी ले ली।

अच्छा आदमी तो वो भी है,
जिसका दोस्त और नौकर पुराने हैं।

शहर में रहकर भी तुमको गांव याद आएगा,
पुराने उन साथियों का साथ याद आएगा।
रोटियां जब खाएगा तो मां महसूस होगी,
सुबह काम पर जाएगा तो बाप याद आएगा।।

मुसीबत में बुजुर्गों के दिलासे काम आते हैं,
अगर सेनापति टूटे तो लस्कर टूट जाता है।
मेरा दुश्मन परेशां है मेरी मां की दुआओं से,
वो जब भी वार करता है तो खंजर टूट जाता है।

दौलत भीख मांगने पर भी मिल जाती है,
लेकिन इज्जत तो कमानी पड़ती है।।

मेरे बच्चों मुझे दिल खोल के तुम खर्च करो,
मैं अकेला ही कमानें के लिए काफी हूं।।

कुछ अलग करना है तो वफ़ा करो दोस्त,
मजबूरी के नाम से बेवफ़ाई तो सभी करते हैं।

हारता वो है जो शिकायतें बार बार करता है,
जीतता वो है जो कोशिश हजार करता है।

कबीरा कुआं एक है पानी भरें अनेक,
बर्तन में ही भेद है, पानी सब में एक।

शामे गम बांटने को शहर में कोई नहीं है,
कटती है तन्हा वक्त काटने को कोई नहीं है।
जह़न में ख्वाब है और जिंदगी पहेली है,
दिन में काम करता हूं और रात अकेली है।

असली खेल वहीं से शुरू होगा,
जहां आपको लगे कि सब खत्म हो चुका है।

हुस्न खुदा ने दिया, आशिक हम हो गए;
वो नसीब किसी और की थी बर्बाद हम हो गए।

LATEST VISUAL STORIES