जय माता दी! नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में बड़ी ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। आज नवरात्रि का चौथा दिन है, जो ब्रह्मांड की रचना करने वाली आदि शक्ति मां कुष्मांडा को समर्पित है। कहते हैं कि मां कुष्मांडा की मंद मुस्कान से ही इस सृष्टि का निर्माण हुआ था।

नवरात्रि के इन नौ दिनों में हर भक्त चाहता है कि वह माता रानी की भक्ति में लीन रहे। ऐसे में अगर आप भी माता के दर्शन को व्याकुल हैं और अपनी भावनाएं शब्दों में पिरोना चाहते हैं, तो एक ऐसा भजन या पचरा है जो सीधे दिल में उतर जाता है। वह भजन है— "दुर्गा मैया के दीवाने दो नैन, दरस बिना जिया ना लगे।"
आज के इस खास लेख में हम आपके लिए इसी वायरल और दिल छू लेने वाले पचरे के पूरे बोल (Lyrics) लेकर आए हैं। आइए, मां कुष्मांडा का ध्यान करते हुए इस मधुर भजन का आनंद लें।
क्यों खास है यह पचरा/भजन? (Significance of the Bhajan)
इस भजन में एक भक्त की उस असीम तड़प और प्रेम को दर्शाया गया है, जब वह अपनी अंबे मैया के दर्शन के लिए व्याकुल होता है। "प्यासी प्यासी अखियां हैं, प्यासी है नजरिया..." जैसी पंक्तियां सुनकर किसी भी माता के भक्त की आंखें छलक उठती हैं। यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच का एक सीधा संवाद है।
🎵 'दुर्गा मैया के दीवाने दो नैन' - संपूर्ण भजन के बोल (Full Lyrics) 🎵
॥ मुखड़ा ॥
दुर्गा मैया के दीवाने दो नैन,
दरस बिना जिया ना लगे।
हो... दुर्गा मैया के दीवाने दो नैन,
दरस बिना जिया ना लगे॥॥ पहला अंतरा ॥
प्यासी प्यासी अंखियां हैं, प्यासी है नजरिया,
छोड़ कहां जाऊं अंबे मैया की दुवरिया।
सारी दुनिया में मिले ना कहीं चैन,
दरस बिना जिया ना लगे...
दुर्गा मैया के दीवाने दो नैन,
दरस बिना जिया ना लगे॥॥ दूसरा अंतरा ॥
पल में बनाती मैया पल में मिटाती,
धूप-छांव जैसी माया समझ ना आती।
ये धरती अंबर चंदा तारे तेरी देन,
दरस बिना जिया ना लगे...
दुर्गा मैया के दीवाने दो नैन,
दरस बिना जिया ना लगे॥॥ तीसरा अंतरा ॥
भूले ना भुलाए भोली-भाली सी सुरतिया,
मैया तेरे दर पे बीते हमरी उमरिया।
झलके नैनों से ये गंगा दिन रैन,
दरस बिना जिया ना लगे...
दुर्गा मैया के दीवाने दो नैन,
दरस बिना जिया ना लगे॥
भजन का भावार्थ (Meaning Behind the Lyrics)
समर्पण: भक्त माता से कहता है कि मेरी आंखें आपके दर्शन की प्यासी हैं, मैं आपका दर छोड़कर इस दुनिया में कहीं और नहीं जाना चाहता क्योंकि मुझे असली शांति यहीं मिलती है।
माता की महिमा: दूसरी पंक्तियों में माता की माया का वर्णन है कि कैसे यह पूरी सृष्टि, चांद-तारे सब माता रानी की ही देन हैं।
अटूट प्रेम: अंत में भक्त प्रार्थना करता है कि माता की भोली सूरत वह कभी न भूले और उसकी पूरी उम्र माता के चरणों की सेवा करते हुए ही बीत जाए।
नवरात्रि में कैसे करें इस भजन का पाठ?
आज मां कुष्मांडा का दिन है। शाम के समय जब आप माता की आरती करें, तो एक घी का दीपक जलाकर, माता को मालपुए का भोग लगाएं और शांत मन से इस भजन को गाएं या सुनें। यकीन मानिए, आपको एक अद्भुत मानसिक शांति का अनुभव होगा।
माता रानी आप सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें। जय माता दी! 🙏
अगर आपको यह भजन पसंद आया हो, तो इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ व्हाट्सएप (WhatsApp) और फेसबुक (Facebook) पर जरूर शेयर करें, ताकि वे भी माता की भक्ति का आनंद ले सकें। कमेंट बॉक्स में 'जय माता दी' लिखना न भूलें!
Tags: Navratri Day 4, Maa Kushmanda, Durga Bhajan Lyrics, Pyasi Pyasi Akhiyan Bhajan, Navratri Pachra, Mata Rani Ke Bhajan, Google Discover Trending Bhajan, Navratri 2026